काव्य

दोपहर के बैठे
हो रही है शाम,
कुछ न सुझा
मेरे मन को आप
चाहता हूँ लिखनाा

पर ढँग नही है आप

सोचता हूँ कुछ आएगी
अक्ल मेरी खुल जाएगी
काव्य प्रकाशित हो जाएगा,
सबके मन को लुभाएगा

शेख चिल्ली की तरह,
देखता हूँ ख्वाब,
कभी तो छप जाए
मेरे लिखे काव्य,

एक और बकवास,
छप जाए काव्य,
हो गयी है रात
अबतक ना बनी बात,
सोचा छोडो चलो
नही बस का मेरे काव्य |

 

मैं अपने ब्लॉग को #Blogchatter के #MyFriendAlexa के साथ अगले स्तर पर ले जा रहा हूं।

1,671 total views, 6 views today

17 thoughts on “काव्य

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *